विवाह व्यभिचार के डर से नहीं, परमेश्वर की मूल स्थापना से है!
Updated: Oct 13
MASIIH YESHUA MEN AAP SABOH KI SALAMATI QAYAM RAHE.,
आज का हमारा विषय विवाह, शरीर की पवित्रता और परमेश्वर की मूल योजना (Will of God) पर आधारित है।
संसार विवाह को केवल एक सामाजिक समझौता, इंसानी नियम या शारीरिक आवश्यकता (व्यभिचार से बचने का साधन) मानता है। परंतु परमेश्वर के वचन के अनुसार—विवाह कोई सांसारिक समझोता नहीं, बल्कि यह परमेश्वर की अपनी पवित्र रचना (Creation of God), उसका दर्शन (Vision of God) और एक मुक़द्दस अहद (Holy Covenant) है, जिसका साक्षी (Witness) स्वयं खुदा है।
आज हम मुक़द्दस kalam men से यह समझेंगे कि कैसे 'नर, नारी और खुदा' मिलकर एक आत्मिक यूनिट (One Unit) बनते हैं, और क्यों हमारा शरीर पवित्र आत्मा का मंदिर होने के कारण हर प्रकार की अशुद्धता से अलग रहना चाहिए।"
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TO ABHI HUM ATE AAJ KE VISHE PAR,.,
1 कुरिन्थियों 7
1 कुरिन्थियों 7
विवाह से सम्बन्धित प्रश्न
: यह अच्छा है कि पुरुष स्त्री को न छूए। 2परन्तु व्यभिचार के डर से हर एक पुरुष की पत्नी, और हर एक स्त्री का पति हो। 3पति अपनी पत्नी का हक्क पूरा करे; और वैसे ही पत्नी भी अपने पति का। 4पत्नी को अपनी देह पर अधिकार नहीं पर उसके पति का अधिकार है; वैसे ही पति को भी अपनी देह पर अधिकार नहीं, परन्तु पत्नी का है।
कुरिन्थियों 1
अभिवादन
1पौलुस की ओर से जो परमेश्वर की इच्छा से यीशु मसीह का प्रेरित होने के लिये बुलाया गया और भाई सोस्थिनेस की ओर से, 2परमेश्वर की उस कलीसिया के नाम जो कुरिन्थुस में है, अर्थात् उनके नाम जो मसीह यीशु में पवित्र किए गए, और पवित्र होने के लिये बुलाए गए हैं; और उन सब के नाम भी जो हर जगह हमारे और अपने प्रभु यीशु मसीह के नाम से प्रार्थना करते हैं।
मत्ती 19
तलाक के विषय यीशु की शिक्षा
3तब फरीसी उसकी परीक्षा करने के लिए पास आकर कहने लगे, “क्या हर एक कारण से अपनी पत्नी को त्यागना उचित है?” 4उसने उत्तर दिया, “क्या तुम ने नहीं पढ़ा कि जिसने उन्हें बनाया, उसने आरम्भ से नर और नारी बनाकर कहा,
यिसु मसीह विवाह के विषय को केवल व्यभिचार से बचने का उपाय बनाकर नहीं, बल्कि परमेश्वर की सृष्टि की मूल स्थापना—नर और नारी का एक तन होना—के आधार पर समझाते हैं।
Paidáish 2
: 18Aur Ḳhudáwand Ḳhudá ne kahá, ki Ádam ká akelá rahná achchhá nahíṉ; maiṉ us ke liye ek madadgár us kí mánind banáúṉgá
परमेश्वर ने हव्वा को व्यभिचार के कारण या व्यभिचार के डर से नहीं बनाया, बल्कि आदम के अकेले रहने को अच्छा नहीं पाया और उसके लिए एक सहायक बनाया।
1. विवाह का मूल कारण व्यभिचार का डर नहीं, परमेश्वर की मर्ज़ी है आदम के लिए
5‘इस कारण मनुष्य अपने माता–पिता से अलग होकर अपनी पत्नी के साथ रहेगा और वे दोनों एक तन होंगे?’
6अत: वे अब दो नहीं, परन्तु एक तन हैं। इसलिये जिसे परमेश्वर ने जोड़ा है, उसे मनुष्य अलग न करे।” 7उन्होंने उससे कहा, “फिर मूसा ने यह क्यों ठहराया कि त्यागपत्र देकर उसे छोड़ दे?” 8उसने उनसे कहा, “मूसा ने तुम्हारे मन की कठोरता के कारण तुम्हें अपनी–अपनी पत्नी को छोड़ देने की आज्ञा दी, परन्तु आरम्भ से ऐसा नहीं था। 9और मैं तुम से कहता हूँ, कि जो कोई व्यभिचार को छोड़ और किसी कारण से अपनी पत्नी को त्यागकर दूसरी से विवाह करे, वह व्यभिचार करता है; और जो उस छोड़ी हुई से विवाह करे, वह भी व्यभिचार करता है।”
10चेलों ने उससे कहा, “यदि पुरुष का स्त्री के साथ ऐसा सम्बन्ध है, तो विवाह करना अच्छा नहीं।” 11उसने उनसे कहा, “सब यह वचन ग्रहण नहीं कर सकते, केवल वे जिनको यह दान दिया गया है। 12क्योंकि कुछ नपुंसक ऐसे हैं, जो माता के गर्भ ही से ऐसे जन्मे; और कुछ नपुंसक ऐसे हैं, जिन्हें मनुष्य ने नपुंसक बनाया; और कुछ नपुंसक ऐसे हैं, जिन्होंने स्वर्ग के राज्य के लिए अपने आप को नपुंसक बनाया है। जो इसको ग्रहण कर सकता है, वह ग्रहण करे।”
Lúqá 20
: 27Phir Sadúqí jo kahte haiṉ, ki qiyámat hai hí nahíṉ, un meṉ se baʻz ne us ke pás ákar yih suwál kiyá, ki 28Ai ustád. Músá ne hamáre liye likhá hai, ki agar kisí ká biyáhá húá bháí beaulád mar jáe, to us ká bháí us kí bíwí ko kar le, aur apne bháí ke liye nasl paidá kare. 29Chunáṉchi sát bháí the: pahle ne bíwí kí, aur beaulád mar gayá. 30Phir dúsre ne use liyá, aur tísre ne bhí; 31isí tarah sátoṉ beaulád mar gaye. 32Ákhir ko wuh ʻaurat bhí mar gayí. 33Pas qiyámat meṉ wuh ʻaurat un meṉ se kis kí bíwí hogi? kyúṉki wuh sátoṉ kí bíwí baní thí. 34Yisúʻ ne un se kahá, ki Is jahán ke farzandoṉ meṉ to biyáh shádí hoti hai; 35lekin jo log is láiq ṭhahreṉge, ki us jahán ko hásil kareṉ, aur murdoṉ meṉ se jí uṭheṉ, un meṉ biyáh shádí na hogí; 36kyúṉki wuh phir marne ke bhí nahíṉ, is liye ki firishtoṉ ke barábar hoṉge; aur qiyámat ke farzand hokar Ḳhudá ke bhí farzand hoṉge. 37Lekin is bát ko ki murde jí uṭhte haiṉ, Músá ne bhí Jháṛí ke zikr meṉ záhir kiyá hai; chunáṉchi wuh Ḳhudáwand ko Ibráhím ká Ḳhudá aur Izháq ká Ḳhudá aur Yaʻqúb ká Ḳhudá kahtá hai. 38Lekin Ḳhudá murdoṉ ká Ḳhudá nahíṉ, balki zindoṉ ká hai; kyúṉki us ke nazdík sab zinda haiṉ.
Paidáish 38
: 6Aur Yahúdáh apne pahlauṭhá beṭe ‘Er ke liye ek ‘aurat biyáh láyá, jis ká nám Tamar thá. 7Aur Yahúdáh ká pahlauṭhá beṭá ‘Er Ḳhudáwand kí nigáh meṉ sharír thá: so Ḳhudáwand ne use halák kar diyá. 8Tab Yahúdáh ne Onán se kahá, ki Apne bháí kí bíwí ke pás já, aur dewar ká haqq adá kar, táki tere bháí ke nám se nasl chale. 9Aur Onán jántá thá ki Yih nasl merí na kahláegí: so yúṉ húá, ki jab wuh apne bháí kí bíwí ke pás játá to nutfe ko zamín par girá detá thá ki mabádá us ke bháí ke nám se nasl chale. 10Aur us ká yih kám Ḳhudáwand kí nazar meṉ bahut burá thá; is liye us ne use bhí halák kiyá.
शरीर कोई साधारण वस्तु नहीं: संसार और शारीरिक सोच शरीर को केवल भोग-विलास, व्यभिचार या पाप का साधन मानती है, लेकिन बाइबल कहती है कि विश्वासी का शरीर खुद जीवित परमेश्वर (खुदा) की रूह (पवित्र आत्मा) का मक़्दस (मंदिर / Sanctuary) है।
विवाह और मनुष्य का जीवन परमेश्वर की रचना (Creation) और उसकी मर्जी है। जब शरीर पवित्र आत्मा का मंदिर है, तो इसे किसी भी अशुद्धता (जैसे व्यभिचार या ओनान जैसी स्वार्थी हरकतों) से दूर रखना चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर खुदा की पवित्रता के खिलाफ है।
"क्योंकि दाम देकर مول मोल लिए गए हो, इसलिए अपनी देह से परमेश्वर की महिमा करो।" हमारा शरीर और हमारा पूरा जीवन, जिसमें हमारा विवाह और परिवार भी शामिल है, पूरी तरह से खुदा की मर्जी और उसके अधिकार के अधीन है।
1 Thissaluníkíoṉ 4
: 3Chunáṉchi Ḳhudá kí marzí yih hai, ki tum pák bano, yaʻní harámkárí se bache raho; 4aur har ek tum meṉ se pákízagí aur ʻizzat ke sáth apne zarf ko hásil karná jáne; 5na shahwat ke josh se, un qaumoṉ kí mánind jo Ḳhudá ko nahíṉ jántíṉ:
खुदा का अधिकार: हमारा जीवन, हमारा शरीर और हमारे रिश्ते—सब कुछ खुदा की मर्जी और उसके नियंत्रण में हैं। इसे पवित्र रखना ही उसकी महिमा करना है।
शादी कोई इंसानी दुनिया या व्यभिचार या सामाजिक रिश्ता YA SAMJHAUTA NHIनहीं है, शादी खुदा की OR SE MUQADAS AHD JISKA GAWAH KHUD KHUDA BAAP HOTA HAI KHDUA RUH शादी खुदा की मर्जी है, सहायक बीवी खुदा की ओर से अनुग्रह है। तो यानी यह विल ऑफ गॉड (परमेश्वर की इच्छा) है, विजन ऑफ गॉड (परमेश्वर का दर्शन) किसकी जिंदगी में? आदम की, नर की, तो इसका फैसला खुदा करता है। यह भी खुदा की रचना है।
मालाकी 2:14: "क्योंकि प्रभु तेरे और तेरी जवानी की पत्नी के बीच साक्षी (Witness) रहा है..."
सभोपदेशक 4:12: "और यदि कोई अकेले पर प्रबल हो जाए, तो दो उसका सामना कर सकेंगे। जो डोरी तीन धागों से बनी हो, वह जल्दी नहीं टूटती।"
मत्ती 19:6: "अत: वे अब दो नहीं, परन्तु एक तन हैं। इसलिए जिसे परमेश्वर ने जोड़ा है, उसे मनुष्य अलग न करे।"
अर्थात: औरत, मर्द और खुदा मिलकर एक ही यूनिट (One Unit) हैं।

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